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धुले में सूखे जैसे हालात, प्रभारी मंत्री जयकुमार रावल ने खेतों का किया दौरा

धुले। महाराष्ट्र के धुले जिले में बारिश की कमी का असर अब खेतों पर साफ दिखाई देने लगा है। पानी की कमी के कारण कपास के पौधों की बढ़त रुक गई है, कई जगह कपास के डोडे पूरी तरह विकसित नहीं हो पाए हैं और मक्का की फसल भी ठीक तरह से तैयार नहीं हो सकी है। किसानों की इस स्थिति का जायजा लेने के लिए राज्य के मार्केटिंग और प्रोटोकॉल मंत्री तथा धुले जिले के प्रभारी मंत्री जयकुमार रावल ने मंगलवार को शिंदखेड़ा और साकरी तालुका के सूखा प्रभावित इलाकों का दौरा किया।
रावल ने शिंदखेड़ा तालुका में चिमथाने-शेवाड़े रोड के किनारे स्थित खेतों का निरीक्षण किया। इसके बाद उन्होंने साकरी तालुका के छावड़ी इलाके में भी सूखे से प्रभावित खेतों में पहुंचकर फसलों की स्थिति देखी। इस दौरान उन्होंने कपास, मक्का और दूसरी खरीफ फसलों का बारीकी से जायजा लिया। खेतों में कई जगह कपास के पौधे सामान्य ऊंचाई तक नहीं पहुंच पाए थे और मक्का की बालियां भी अधूरी दिखाई दीं।
मंत्री ने किसानों से सीधे बातचीत कर उनकी परेशानियां सुनीं। किसानों ने बताया कि शुरुआती बारिश के बाद लंबे समय तक पर्याप्त वर्षा नहीं होने से फसलों की बढ़वार प्रभावित हुई। कपास और मक्का जैसी फसलें सबसे ज्यादा प्रभावित हुई हैं। कई किसानों ने उत्पादन में भारी कमी की आशंका जताई और कहा कि अगर आने वाले दिनों में हालात नहीं सुधरे तो खेती की लागत निकालना भी मुश्किल हो सकता है।
किसानों ने मंत्री के सामने केवल फसल नुकसान ही नहीं, बल्कि पानी और पशुओं के चारे की समस्या भी रखी। ग्रामीणों का कहना था कि अगर बारिश की कमी इसी तरह बनी रही तो आने वाले महीनों में पशुओं के लिए पर्याप्त चारा जुटाना मुश्किल होगा। इसके अलावा पीने के पानी और सिंचाई के लिए उपलब्ध जलस्रोतों पर भी दबाव बढ़ सकता है।
दौरे के दौरान जयकुमार रावल ने कपास के अधूरे डोडे और मक्का की कमजोर फसल को खुद देखा। उन्होंने कहा कि खेतों में जाकर स्थिति देखने के बाद नुकसान की गंभीरता साफ समझ में आती है। उनका कहना था कि बारिश ने साथ नहीं दिया, जिसके कारण कपास और मक्का दोनों की फसलों को बड़ा नुकसान हुआ है।
रावल ने किसानों को भरोसा दिलाया कि सरकार उनकी समस्याओं को गंभीरता से ले रही है। उन्होंने अधिकारियों से प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति का सही आकलन करने और आगे की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए योजना तैयार करने को कहा। मंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि केवल मौजूदा फसल नुकसान ही नहीं, बल्कि अगले 10 से 12 महीनों की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयारी करनी होगी।
धुले जिले में इस साल मानसून की शुरुआत के बाद किसानों ने सामान्य उम्मीद के साथ बुवाई की थी। लेकिन इसके बाद बारिश में लंबा अंतराल आ गया। कई खेतों में पर्याप्त नमी नहीं रह सकी और इससे फसलों का विकास प्रभावित हुआ। साकरी तालुका में भी शुरुआती बारिश के बाद लंबे सूखे दौर ने खरीफ फसलों को नुकसान पहुंचाया।
शिंदखेड़ा तालुका के कुछ हिस्सों में स्थिति इतनी खराब बताई जा रही है कि किसानों ने उत्पादन की उम्मीद छोड़कर कपास के खेतों में पशु छोड़ दिए। इसका उद्देश्य कम से कम सूखी फसल को पशुओं के चारे के रूप में इस्तेमाल करना बताया गया है। इससे क्षेत्र में सूखे जैसे हालात की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
धुले जिले की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा कृषि पर निर्भर है। कपास, मक्का और अन्य खरीफ फसलें यहां बड़ी संख्या में किसानों के लिए आय का मुख्य साधन हैं। ऐसे में बारिश की कमी और फसल कमजोर रहने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ सकता है। उत्पादन कम होने की स्थिति में किसानों के सामने कर्ज चुकाने, अगली फसल की तैयारी और परिवार के दैनिक खर्च की चुनौती खड़ी हो सकती है।
महाराष्ट्र के कई हिस्सों में इस वर्ष बारिश की कमी और लंबे सूखे दौर ने कृषि को प्रभावित किया है। राज्य सरकार ने हाल ही में 265 तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित किया है। इसके साथ ही फसल ऋण के पुनर्गठन, भूमि राजस्व में राहत और अन्य सहायता उपायों की घोषणा भी की गई है।
सरकार की ओर से प्रभावित क्षेत्रों में फसल नुकसान के आकलन की प्रक्रिया भी शुरू की गई है। विस्तृत सर्वे के बाद ही किसानों को मिलने वाली आर्थिक सहायता और राहत का अंतिम स्वरूप तय होगा। इस बीच स्थानीय प्रशासन को जल उपलब्धता, पशु चारा और रबी सीजन की तैयारी पर भी ध्यान देने के निर्देश दिए जा रहे हैं।
किसानों की सबसे बड़ी चिंता अब आने वाले महीनों को लेकर है। खरीफ की फसल कमजोर होने के बाद उनके सामने रबी सीजन की तैयारी का सवाल भी है। यदि जलस्रोतों में पर्याप्त पानी नहीं रहा तो रबी की बुवाई भी प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा पशुपालकों के सामने चारे की कमी गंभीर समस्या बन सकती है।
जयकुमार रावल ने दौरे के दौरान अधिकारियों से प्रभावित गांवों की वास्तविक स्थिति का रिकॉर्ड तैयार करने को कहा। उन्होंने किसानों को भरोसा दिलाया कि नुकसान की जानकारी सरकार तक पहुंचाई जाएगी और उपलब्ध योजनाओं के तहत सहायता देने के प्रयास किए जाएंगे।
फिलहाल धुले जिले में सूखे जैसे हालात ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। कपास की रुकी हुई बढ़वार, अधूरे डोडे और मक्का की कमजोर फसल खेतों में संकट की तस्वीर दिखा रही है। प्रभारी मंत्री के दौरे के बाद अब किसानों की नजर प्रशासन के सर्वे और सरकार की राहत व्यवस्था पर है।





